विद्यापति गोष्ठी आ किरणजी

Authors

  • डॉ. अतुलेश्वर झा विद्यापति गोष्ठी आ किरणजी

DOI:

https://doi.org/ 10.5281/zenodo.23118142

Keywords:

विद्यापति ,विद्यापति गोष्ठी ,किरणजी , मैथिली साहित्य , साहित्यिकी चेतना , मैथिली काव्य ,प्रकाशन , साहित्यिकी योगदान

Abstract

मिथिलाक साहित्यिक आ सांस्कृतिक इतिहासमे सरिसवक विद्यापति-गोष्ठीक स्थान विशिष्ट रहल अछि। ई गोष्ठी केवल महाकवि विद्यापतिक स्मरण अथवा हुनकर पदावलीक गायन-व्याख्यापर केन्द्रित साहित्यिक आयोजन नहि छल, बल्कि एकर पाछाँ मैथिली भाषा, साहित्य आ सांस्कृतिक चेतनाक व्यापक उद्देश्य सक्रिय छल। विशेष रूपसँ ग्रामीण परिवेशमे साहित्यिक गोष्ठीक आयोजन कऽ सरिसवक गोष्ठी साहित्यकेँ अभिजात बौद्धिक परिसर सँ निकालि सामान्य जनजीवन, विद्यार्थी आ नवपीढ़ीक बीच पहुँचाबयमे महत्वपूर्ण भूमिका निभौलक। सरिसबक विद्यापति-गोष्ठीक विशेषता एकर परम्परा आ आधुनिक चेतनाक समन्वयमे निहित छल। एक दिस ई गोष्ठी विद्यापतिक साहित्यिक विरासतकेँ जीवित रखबाक काज करैत छल, तँ दोसर दिस मैथिली भाषाप्रति गौरव, अपनत्व आ सामुदायिक चेतना विकसित करैत छल। डॉ. काञ्चीनाथ झा ‘किरण’क संस्मरणमे सेहो सरिसवक विद्यापति-गोष्ठीकेँ मैथिली-विकासक महत्वपूर्ण संस्थाक रूपमे देखाओल गेल अछि तथा ग्रामीण क्षेत्रक छात्रसभमे मैथिलीप्रति प्रेम जागृत करबाक एकर प्रभावक संकेत भेटैत अछि। एहि कारण सरिसवक गोष्ठीकेँ मात्र एकटा स्थानीय साहित्यिक कार्यक्रम मानब ओकर वास्तविक महत्त्वकेँ सीमित करब होयत। वस्तुतः ई मैथिली भाषिक अस्मिता, साहित्यिक जनजागरण आ सांस्कृतिक पुनर्चेतनाक एक सक्रिय केन्द्र छल, जाहि ठाम विद्यापतिक स्मृति माध्यम बनि मैथिली समाजक वर्तमान आ भविष्यक प्रश्नसभसँ जुड़ैत छल। एहि परिप्रेक्ष्यमे सरिसवक विद्यापति-गोष्ठीक अध्ययन मैथिली साहित्यक संस्थागत इतिहास तथा आधुनिक मैथिली आन्दोलनक विकासकेँ बुझबाक लेल विशेष रूपसँ प्रासंगिक बुझाइत अछि।

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References

Published

2026-10-03

How to Cite

डॉ. अतुलेश्वर झा. (2024). विद्यापति गोष्ठी आ किरणजी International Journal of Management, Engineering and Social Sciences,3(1), 38-40.
https://doi.org/ 10.5281/zenodo.23118142

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